नई दिल्ली: मालेगांव बम धमाका मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की विशेष अदालत ने आज एक बड़ा फैसला सुनाते हुए सभी सात आरोपियों को बरी कर दिया है। बरी होने वालों में भाजपा सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर, लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित, सुधाकर द्विवेदी, रमेश उपाध्याय, समीर कुलकर्णी, अजय राहिरकर और सुधाकर चतुर्वेदी शामिल हैं।
विशेष एनआईए अदालत के न्यायाधीश ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में विफल रहा कि विस्फोट में इस्तेमाल की गई मोटरसाइकिल में बम रखा गया था। अदालत ने अपने फैसले में यह भी उल्लेख किया कि “अभियोजन पक्ष ने यह तो साबित कर दिया कि मालेगांव में विस्फोट हुआ था।
लेकिन, यह साबित नहीं कर पाया कि उस मोटरसाइकिल में बम रखा गया था। अदालत ने मेडिकल प्रमाणपत्रों में हेराफेरी का भी जिक्र किया, यह कहते हुए कि घायलों की उम्र 101 नहीं, बल्कि 95 साल थी, और कुछ मेडिकल सर्टिफिकेट में छेड़छाड़ की गई थी।
कोर्ट के फैसले के मुख्य बिंदु:
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि श्रीकांत प्रसाद पुरोहित (अब लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित) के आवास में विस्फोटकों के भंडारण या संयोजन का आरोप साबित नहीं हुआ। यह फैसला मालेगांव बम धमाके के मामले में एक महत्वपूर्ण मोड़ है, जो 29 सितंबर 2008 को महाराष्ट्र के मालेगांव में हुआ था। इस धमाके में छह लोगों की मौत हो गई थी और 101 लोग घायल हुए थे।

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