2 July 2026

पंजाब से नैनीताल घूमने आए 45 स्कूली बच्चों की जान पर मंडराया खतरा, परिवहन विभाग की सतर्कता से टला हादसा

हल्द्वानी : पंजाब से स्कूली बच्चों को नैनीताल घूमने लाई एक पर्यटक बस का ड्राइवर शराब के नशे में धुत होकर गाड़ी चलाता पकड़ा गया। परिवहन विभाग की तत्परता और पीछा करने पर बस को रोककर बड़ा हादसा टल गया। ड्राइवर के ब्लड में अल्कोहल की मात्रा सामान्य सीमा से 18 गुना अधिक पाई गई। बस के कागजात भी अधूरे थे और फिटनेस सर्टिफिकेट तक नहीं था।

सोमवार को कालाढूंगी-नैनीताल मार्ग पर सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (एआरटीओ) जितेंद्र सिंगवान की टीम वाहनों की नियमित चेकिंग कर रही थी। बैलपड़ाव की ओर से आ रही हरियाणा नंबर की बस (एचआर 37डी-9675) ने चेकिंग टीम का इशारा नजरअंदाज कर रफ्तार बढ़ा दी। शक होने पर एआरटीओ सिंगवान ने टीम के साथ बस का पीछा किया और कालाढूंगी पुलिस की मदद से नयागांव के पास बस को रोक लिया।

जांच में पता चला कि बस में पंजाब के मानसा जिले के एक स्कूल के 45 बच्चे और उनके शिक्षक सवार थे। बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए टीम ने तुरंत कार्रवाई की। ड्राइवर कुलदीप सिंह (निवासी पटियाला) की एल्कोमीटर जांच में उसके ब्लड में 550 एमएल/100 एमजी अल्कोहल पाया गया, जबकि नियमों के अनुसार 30 एमएल से अधिक होने पर ही चालान होता है। यानी ड्राइवर ने अत्यधिक मात्रा में शराब पी रखी थी।

बस सीज, ड्राइवर का चालान और लाइसेंस निलंबित

  • बस के कागजात अधूरे, फिटनेस सर्टिफिकेट नहीं, हरियाणा का टैक्स तक जमा नहीं।
  • बस को कालाढूंगी कोतवाली में सीज कर दिया गया।
  • मोटर वाहन अधिनियम की धारा 184 के तहत चालान किया गया।
  • ड्राइवर का ड्राइविंग लाइसेंस 6 महीने के लिए निलंबित।
  • नशे में वाहन चलाने पर 6 महीने तक की कैद और 10 हजार रुपये तक जुर्माने का प्रावधान।

बच्चों को सुरक्षित पहुंचाया होटल

नशे में होने के कारण ड्राइवर को काबू करने और थाने तक लाने में साढ़े तीन घंटे लग गए। इस दौरान बच्चे और शिक्षक डरे हुए थे। एआरटीओ टीम ने बच्चों को दिलासा दिया और उन्हें बैलपड़ाव स्थित बुकिंग होटल तक सुरक्षित पहुंचाया। टीम में सहायक उपनिरीक्षक अरविंद ह्यांकी, चालक महेंद्र आदि मौजूद रहे।

एआरटीओ जितेंद्र सिंगवान ने कहा, “बस में बच्चे थे, इसलिए हमने कोई रिस्क नहीं लिया। ड्राइवर इतने नशे में था कि पटियाला से यहां तक का सफर तय कर लिया। यदि समय रहते न पकड़ा जाता तो पहाड़ी रास्तों पर बड़ा हादसा हो सकता था। गनीमत रही कि बच्चों की जान बच गई।

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