चमोली। नए साल की शुरुआत के बावजूद उत्तराखण्ड के पहाड़ी क्षेत्रों में अब तक बारिश और बर्फबारी नहीं हो सकी है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार आने वाले कुछ दिनों में भी बर्फबारी की संभावनाएं कम ही बनी हुई हैं। जबकि, सुबह और शाम के तापमान में निरंतर गिरावट से समूचा पहाड़ कड़ाके की ठंड और शीतलहर की चपेट में हैं।
उत्तराखंड में बीते सालों के बारिश और बर्फबारी के आंकड़ों को देखें तो वर्ष 2019 के बाद से पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश और बर्फबारी में लगातार कमी आई है। शीतकाल में मौसम के बदले मिजाज ने विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ा दी है। पर्याप्त वर्षा और हिमपात न होने के कारण निचले इलाकों में सूखे जैसे हालात बनने लगे हैं। मौसम की बेरुखी का सबसे अधिक असर बागवानी पर पड़ रहा है। सेब के बागान नमी की कमी से प्रभावित हो रहे हैं, जिससे पौधों में बीमारियां फैलने का खतरा बढ़ गया है। समय पर बर्फबारी न होने से आवश्यक चिलिंग ऑवर पूरे नहीं हो पा रहे हैं, जिससे उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है। इस स्थिति ने बागवानों को मायूस कर दिया है।
हालांकि, उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले सप्ताह में मौसम करवट ले सकता है और पहाड़ों में बर्फबारी से राहत मिल सकती है। लेकिन वर्तमान हालात और मौसम की अनिश्चितता को देखते हुए फिलहाल राहत की उम्मीदें धुंधली नजर आ रही हैं।

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