16 January 2026

पहाड़ की लोक संस्कृति के संवाहक बने मुकेश हटवाल

देहरादून। चमोली जनपद के ग्राम गडोरा निवासी एवं वर्तमान में विधानसभा सचिवालय में समीक्षा अधिकारी के पद पर कार्यरत मुकेश हटवाल सरकारी दायित्वों के साथ-साथ उत्तराखंड की लोक संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन में एक प्रेरणादायी उदाहरण बनकर उभरे हैं।

बाल्यकाल में श्रीरामलीला मंच से गायन और अभिनय की शुरुआत करने वाले मुकेश हटवाल ने छात्र जीवन में भी रंगमंच और लोक कला से अपना गहरा नाता बनाए रखा। वर्ष 1995 में अपना पहला गीत लिखकर उन्होंने लोक संगीत की दुनिया में कदम रखा। इसके बाद ‘बौडरूं मा छौं’ तथा अपने दिवंगत पिता, प्रसिद्ध संगीतकार स्व. बृजमोहन हटवाल की स्मृति में प्रस्तुत कैसेट ‘भगवान त्यारा नौं पर’ जैसे चर्चित लोक संगीत संग्रहों के माध्यम से उन्होंने पहाड़ी संस्कृति को नई पहचान दी।

मुकेश हटवाल आकाशवाणी देहरादून से ‘बी-हाई ग्रेड’ तथा संस्कृति विभाग उत्तराखंड से ‘बी ग्रेड’ के पंजीकृत लोक गायक हैं। वे निरंतर काव्यपाठ और लोक गायन के माध्यम से अपनी माटी की खुशबू जन-जन तक पहुंचा रहे हैं।

आज वे प्रदेश के विभिन्न सांस्कृतिक मंचों से अपनी कला के जरिए न केवल नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का कार्य कर रहे हैं, बल्कि उत्तराखंड की समृद्ध लोक विरासत को राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।