ज्योतिर्मठ। पर्यटन नगरी औली के अस्तित्व को बचाने के लिए चल रहा ‘औली बचाव संघर्ष समिति’ का आंदोलन दूसरे दिन और अधिक उग्र हो गया है। स्नो मेकिंग मशीन और आइस स्केटिंग रिंक को तत्काल शुरू करने की मांग को लेकर युवा आंदोलनकारियों ने हाड़ कंपा देने वाली ठंड के बीच रातभर क्रमिक अनशन जारी रखा।
आंदोलनकारियों का कहना है कि प्रशासनिक अनदेखी और ठोस निर्णयों के अभाव में औली का शीतकालीन पर्यटन लगातार प्रभावित हो रहा है, जिससे स्थानीय लोगों की आजीविका पर सीधा असर पड़ रहा है। आंदोलन में शामिल युवाओं ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं की गई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
समर्थन न मिलने से नाराज आंदोलनकारियों का आक्रोश अब स्थानीय जनप्रतिनिधियों के खिलाफ भी फूट पड़ा है। आंदोलनकारियों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि जनता की आवाज को अनसुना किया गया तो वे आगामी चुनावों के बहिष्कार का निर्णय लेने को मजबूर होंगे।
इस आंदोलन को स्थानीय घोड़ा-खच्चर संचालकों, जिप्सी टैक्सी चालकों और महिला मंगल दलों का भी पूर्ण समर्थन मिल रहा है। इससे आंदोलन को व्यापक जनसमर्थन मिलने लगा है।
युवा आंदोलनकारी विवेक पवार, पवन कंवाण और वैभव सकलानी ने कहा कि प्रशासन की उदासीनता के कारण औली की बुनियादी पर्यटन व्यवस्थाएं चरमरा गई हैं। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई केवल पर्यटन की नहीं, बल्कि क्षेत्र के भविष्य और रोजगार की है, जिसे अब किसी भी कीमत पर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
पर्यटन और रोजगार के संरक्षण को लेकर शुरू हुआ यह संघर्ष अब एक बड़े जन-आंदोलन का रूप लेता जा रहा है। आने वाले दिनों में यदि मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन और व्यापक रूप लेने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

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