23 January 2026

उत्तराखंड के सभी राजकीय विश्वविद्यालयों में छात्रों के प्रमाणपत्र डीजी लॉकर पर अपलोड करने अनिवार्य

देहरादून: उत्तराखंड के उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने राज्य के सभी राजकीय विश्वविद्यालयों को डिजिटल और शैक्षणिक सुधारों की दिशा में महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। सचिवालय में आयोजित उच्च शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में मंत्री ने कहा कि छात्र-छात्राओं के शैक्षणिक प्रमाणपत्रों को पारदर्शी और आसानी से उपलब्ध बनाने के लिए 31 मार्च 2026 तक शत-प्रतिशत डाटा डीजी लॉकर पर अपलोड किया जाना अनिवार्य है।

डॉ. रावत ने स्पष्ट किया कि पिछले शैक्षणिक सत्रों का लैगेसी डाटा भी समर्थ पोर्टल के माध्यम से डीजी लॉकर पर अपलोड किया जाए और इसकी साप्ताहिक प्रगति रिपोर्ट शासन को भेजी जाए।

बैठक में लंबे समय से खाली पड़े शैक्षणिक एवं गैर-शैक्षणिक पदों पर भर्ती में हो रही देरी पर गहरी नाराजगी जताते हुए मंत्री ने विभागीय अधिकारियों को 10 फरवरी 2026 तक सभी रिक्त पदों के लिए भर्ती विज्ञापन जारी करने के सख्त निर्देश दिए।

नई शिक्षा नीति (एनईपी) के अनुरूप प्रत्येक सेमेस्टर में कम से कम 90 दिन (वार्षिक 180 दिन) कक्षाओं का संचालन सुनिश्चित करने, समय पर परीक्षाएं आयोजित करने और परिणाम घोषित करने के लिए आवश्यक कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए गए। आवश्यकता पड़ने पर परीक्षा पैटर्न में बदलाव भी किया जा सकता है।

विश्वविद्यालय विभिन्न उद्योगों से एमओयू कर छात्रों को अनिवार्य औद्योगिक प्रशिक्षण दिलाएं; मासिक प्रगति रिपोर्ट शासन को प्रस्तुत की जाए। खेलकूद एवं सांस्कृतिक गतिविधियों का नियमित आयोजन कर छात्रों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित किया जाए। इस वर्ष की अंतर्विश्वविद्यालय खेलकूद प्रतियोगिता की जिम्मेदारी पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय को सौंपी गई है।

सभी शिक्षण संस्थानों में बायोमेट्रिक उपस्थिति अनिवार्य लागू की जाए। स्वामी विवेकानंद ई-पुस्तकालय योजना से सभी संस्थानों को जोड़ा जाए; बैठक में इस पर पावरपॉइंट प्रस्तुति भी दी गई और सुझाव आमंत्रित किए गए। बैठक में सचिव उच्च शिक्षा डॉ. रंजीत सिन्हा, निदेशक उच्च शिक्षा वी.एन. खाली, विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलसचिव एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

डॉ. धन सिंह रावत ने कहा, “ये कदम उच्च शिक्षा को अधिक डिजिटल, पारदर्शी, छात्र-केंद्रित और गुणवत्तापूर्ण बनाने की दिशा में निर्णायक होंगे। सभी निर्देशों का समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए।”

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