देहरादून: केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा जनगणना-2027 की अधिसूचना जारी होने के साथ ही उत्तराखंड की सभी प्रशासनिक एवं भौगोलिक सीमाएं सील कर दी गई हैं। अब जनगणना प्रक्रिया पूरी होने तक किसी भी जिले, तहसील, निकाय, पंचायत या वार्ड की सीमाओं में कोई बदलाव नहीं किया जा सकेगा। यह कदम जनगणना के आंकड़ों को सटीक और विश्वसनीय बनाने के लिए उठाया गया है, क्योंकि सीमा परिवर्तन से जनसंख्या डेटा में विसंगति आ सकती है।
हालांकि, इससे सार्वजनिक सुविधाओं या सामान्य प्रशासनिक कार्यों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। निदेशक, जनगणना कार्य निदेशालय, उत्तराखंड ईवा आशीष श्रीवास्तव ने बताया कि अधिसूचना के बाद नए नगर निगम, नगर पालिका या नगर पंचायतों का गठन नहीं किया जा सकेगा, न ही किसी गांव को नगर निकाय में शामिल किया जा सकेगा।
तीन चरणों में होगी जनगणना
- पहला चरण—25 अप्रैल से 24 मई 2026 तक: मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना (हाउस लिस्टिंग एंड हाउसिंग सेंसस)।
- दूसरा चरण—11 से 30 सितंबर 2026 तक: बर्फबारी वाले (स्नोबाउंड) क्षेत्रों में लोगों की जनगणना, क्योंकि इन इलाकों के निवासी सर्दियों में पलायन कर जाते हैं।
- तीसरा चरण—9 से 28 फरवरी 2027 तक: अन्य क्षेत्रों में देशभर के साथ सामान्य जनसंख्या गणना।
प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत 16 फरवरी से हो रही है। पहले चार्ज अधिकारियों को प्रशिक्षित किया जाएगा, जिसमें 23 कर्मचारियों को मास्टर ट्रेनर बनाया जाएगा। ये मास्टर ट्रेनर प्रदेश भर में 555 फील्ड ट्रेनरों को तैयार करेंगे। फील्ड ट्रेनर आगे 4,000 सुपरवाइजरों को प्रशिक्षित करेंगे, जो अंततः प्रदेश के लगभग 30 हजार गणना कर्मचारियों को ट्रेनिंग देंगे। 25 मार्च से 7 अप्रैल के बीच 30 हजार कर्मचारियों और 4,000 सुपरवाइजरों का मुख्य प्रशिक्षण होगा। प्रत्येक बैच में 40 कर्मचारियों को तीन दिनों का प्रशिक्षण दिया जाएगा।

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