10 April 2026

प्रशासन से वार्ता के बाद एनटीपीसी परियोजना पर नौ दिनों से जारी गतिरोध खत्म

ज्योतिर्मठ। एनटीपीसी की तपोवन-विष्णुगाड जल विद्युत परियोजना के खिलाफ पिछले नौ दिनों से चल रहा ग्रामीणों का आंदोलन आखिरकार जिला प्रशासन की मध्यस्थता के बाद समाप्त हो गया है। जिलाधिकारी चमोली गौरव कुमार की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई बैठक के दौरान परियोजना प्रभावितों की 15 सूत्रीय मांगों पर लिखित सहमति बनी, जिसके बाद बुधवार सुबह से परियोजना का निर्माण कार्य आठ दिनों के लंबे अंतराल के बाद पुनः सुचारू हो सका। बुधवार को तहसीलदार जोशीमठ, एनटीपीसी और निर्माणदायी कंपनी एचसीसी (HCC) के अधिकारियों ने तपोवन स्थित कंपनी के मुख्य द्वार पर पहुँचकर प्रदर्शनकारी ग्रामीणों को जिलाधिकारी द्वारा हस्ताक्षरित सहमति पत्र पढ़कर सुनाया, जिसके बाद ग्रामीणों ने अपने क्रमिक धरने को स्थगित करने की घोषणा की।

आंदोलन का नेतृत्व कर रहे प्रधान संघ के अध्यक्ष मोहन बैंजवाल ने इसके उपरांत सेलंग स्थित टीवीएम (TBM) साइट और पैनी-अनिमठ में चल रहे धरना स्थलों पर पहुँचकर जनप्रतिनिधियों को समझौते की जानकारी दी और वहां भी आंदोलन को समाप्त करवाया। हालांकि, ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि यह समाधान अभी अस्थायी है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि अगले 20 दिनों के भीतर उनकी सबसे प्रमुख मांग ‘चारापत्ती मुआवजे’ पर एनटीपीसी प्रबंधन द्वारा कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो वे दोबारा उग्र आंदोलन और कार्य बहिष्कार के लिए बाध्य होंगे।

इस ऐतिहासिक समझौते और कार्य बहाली के अवसर पर क्षेत्र के तमाम प्रमुख जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। इनमें प्रधान संघ के अध्यक्ष मोहन बैंजवाल, सेलंग की ग्राम प्रधान रोशना बिष्ट, क्षेत्र पंचायत सदस्य वर्षा बिष्ट, पैनी की ग्राम प्रधान विनीता देवी, बड़ागांव की क्षेत्र पंचायत सदस्य लक्ष्मी देवी व ग्राम प्रधान बीना देवी, और भंग्यूल की ग्राम प्रधान मिथलेश फर्स्वाण शामिल रहीं। साथ ही, अजीतपाल रावत, अनुज बिष्ट, सेलंग के सरपंच शिशुपाल भंडारी, राजे सिंह बिष्ट और पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य किशन सिंह बिष्ट सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने प्रशासन के आश्वासन पर भरोसा जताते हुए विकास कार्यों को गति देने में सहयोग का वादा किया। प्रशासन को उम्मीद है कि इस सहमति से क्षेत्र में शांति का माहौल बनेगा, वहीं ग्रामीण अब अपनी मांगों पर होने वाली आगामी कार्रवाई को लेकर बेहद सतर्क हैं।