- वनाग्नि रोकथाम को लेकर जिला प्रशासन सख़्त, त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली व जनसहभागिता पर जोर
- संवेदनशील क्षेत्रों में प्रशिक्षण, निगरानी एवं त्वरित सूचना तंत्र को सुदृढ़ करने पर जोर, सभी डीएफओ करेंगे सतत निगरानी
- लागू होगा रियल टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम, तहसील स्तर पर एसडीएम करेंगे समन्वय बैठक
- वनाग्नि रोकथाम के लिए ग्राम पंचायत स्तर तक नेटवर्क मजबूत, प्रधानों व विभागीय दलों के संयुक्त समूह बनेंगे
पौड़ी : जनपद में बढ़ती वनाग्नि की घटनाओं की रोकथाम, त्वरित नियंत्रण एवं प्रभावी प्रबंधन के उद्देश्य से जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गयी। बैठक में वन विभाग, प्रशासन एवं संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ वनाग्नि के कारणों, रोकथाम के उपायों, त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली एवं जनसहभागिता को मजबूत करने पर विस्तृत चर्चा की गयी।
बैठक के दौरान प्रभागीय वनाधिकारी ने जानकारी दी कि वनाग्नि की अधिकांश घटनाएं सिविल क्षेत्रों में सामने आ रही हैं। इस पर जिलाधिकारी ने बताया कि वर्तमान में मैनुअल रिपोर्टिंग के माध्यम से सजग निगरानी की जा रही है। उन्होंने निर्देश दिए कि 1 मई से फायर अलार्म सिस्टम के अनुरूप सभी घटनाओं की सटीक एवं समयबद्ध रिपोर्टिंग सुनिश्चित की जाए, ताकि प्रभावी नियंत्रण एवं त्वरित कार्रवाई संभव हो सके।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि जो व्यक्ति जानबूझकर आड़ा फूकान की घटनाओं में संलिप्त पाए जाते हैं, उन्हें चिन्हित करते हुए उनके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाय तथा जनजागरुकता के माध्यम से ऐसे कृत्यों से बचने के लिए प्रेरित किया जाए। उन्होंने संवेदनशील वन रेंज के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायतों के प्रधानों का न्याय पंचायत स्तर पर प्रशिक्षण आयोजित करने के निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि यह प्रशिक्षण संबंधित क्रू स्टेशन के सहयोग से आयोजित किया जाएगा, जिसमें आवश्यक अग्निशमन उपकरण भी उपलब्ध कराए जाएंगे। बैठक में ग्राम पंचायत विकास अधिकारियों को इस कार्य हेतु नोडल अधिकारी नामित करते हुए ग्राम प्रधानों के समन्वय से कार्य करने के निर्देश दिए गए।
जिलाधिकारी ने निर्देशित किया कि प्रत्येक ग्राम पंचायत में टोल-फ्री नंबर 1926 को प्रदर्शित किया जाय तथा सूचना तंत्र को सशक्त किया जाए, जिससे किसी भी वनाग्नि की सूचना त्वरित रूप से क्रू स्टेशनों तक पहुंच सके। उन्होंने वन विभाग को ग्राम प्रधानों के साथ सतत समन्वय बनाए रखने पर भी जोर दिया। बैठक में जिलाधिकारी ने कंट्रोल बर्निंग की स्थिति की जानकारी ली तथा निर्देश दिए कि वनाग्नि की घटनाओं में रिस्पॉन्स टाइम का आकलन कर उसे न्यूनतम किया जाए और इन घटनाओं को आपदा की तरह गंभीरता से लिया जाए। अग्निशमन विभाग से उपलब्ध उपकरणों एवं कॉल रिस्पॉन्स सिस्टम की भी विस्तृत जानकारी ली गयी।
पीरूल (चीड़ की पत्तियों) के संग्रहण के संबंध में जिलाधिकारी ने डीएफओ को संबंधित संस्था से एमओयू करने के निर्देश दिए, जिससे वनाग्नि की घटनाओं में कमी लायी जा सके। जिलाधिकारी ने डीएफओ लैंसडाउन को निर्देशित किया कि उनके द्वारा तैयार मानक संचालन प्रक्रिया को जनपद में व्यापक रूप से प्रसारित किया जाए। साथ ही, उन्होंने सभी उपजिलाधिकारियों को निर्देश दिए गए कि वे एक सप्ताह के भीतर तहसील स्तर पर बैठक आयोजित करें, जिसमें एसडीओ वन, एडीओ पंचायत, ग्राम प्रधान, पटवारी एवं खंड विकास अधिकारी सम्मिलित हों।
बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने सभी उपजिलाधिकारियों, डीएफओ एवं उप प्रभागीय वनाधिकारियों के साथ वनाग्नि के कारणों, रोकथाम के उपायों एवं प्रभावी नियंत्रण के संबंध में विस्तार से संवाद किया। उन्होंने निर्देशित किया कि ग्राम प्रधानों के साथ व्हाट्सएप समूह बनाए जाएं, जिससे सूचनाओं का त्वरित आदान-प्रदान सुनिश्चित हो सके। इसके अतिरिक्त ग्राम पंचायत स्तर पर वीडीओ, वीपीडीओ, पटवारी एवं क्रू स्टेशन प्रभारियों के संयुक्त समूह गठित किए जाएं। युवक मंगल दलों को भी “फर्स्ट रिस्पॉन्डर” के रूप में शामिल करते हुए उन्हें प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए गए।
जिलाधिकारी ने निर्देशित किया कि प्रत्येक क्रू स्टेशन का ग्राम पंचायतों के साथ मानचित्रण किया जाए जिससे सभी प्रधानों को अपनी निकटस्थ क्रू स्टेशन की जानकारी रहे। साथ ही ग्राम पंचायतों के निकटस्थ क्रू स्टेशनों की सूची उपजिलाधिकारियों को उपलब्ध करायी जाए, जिससे आपात स्थिति में त्वरित संपर्क स्थापित हो सके। साथ ही, वाहनों के माध्यम से व्यापक प्रचार-प्रसार कर जनजागरुकता बढ़ाने के निर्देश दिए गए।
बैठक में डीएफओ द्वारा अवगत कराया गया कि वनाग्नि की घटनाओं की निगरानी हेतु एक सप्ताह के भीतर रियल-टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित किया जाएगा, जिससे घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित किया जा सके।
इस अवसर पर डीएफओ गढ़वाल महातिम यादव, सिविल एवं सोयम पवन नेगी, संयुक्त मजिस्ट्रेट दीक्षिता जोशी, जिला विकास अधिकारी मनविंदर कौर, डीपीआरओ जितेंद्र कुमार, अग्निशमन अधिकारी राजेंद्र खाती, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी दीपेश चंद्र काला सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। साथ ही अन्य उपजिलाधिकारी, डीएफओ तथा एसडीओ वर्चुअल माध्यम से जुड़े रहे।

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