December 6, 2022

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Kailash Mansarover

कैलाश-मानसरोवर में चीन ने तैनात कीं मिसाइलें, भारत को उकसा रहा बौखलाया ड्रैगन

भारत के साथ तनाव और तनातनी के बीच चीन बौखलाया हुआ है। लद्दाख में लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) पर भारत से विवाद में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी चौतरफा घिरते देख ड्रैगन नई-नई चालें चल रहा है। अब चीन ने कैलाश-मानसरोवर में एक झील के पास मिसाइल साइट का निर्माण किया है, जहां वो जमीन से हवा में मार करने वाली मिसाइल बना रहा है।

कैलाश-मानसरोवर में ड्रेगन तैनात कर रहा मिसाइलें

रिपोर्ट के अनुसार “सैटेलाइट से मिली तस्वीरों से इस बात का खुलासा होता है कि चीन मानसरोवर झील के किनारे HQ-9 मिसाइल की तैनाती करने की तैयारी में है, यहां पर चीन HT-233 रडार सिस्टम लगा रहा है, जिससे मिसाइल का फायर सिस्टम काम करता है। इसके अलावा टाइप 305बी, टाइप 120, टाइप 305ए, वाईएलसी-20 और डीडब्ल्यूएल-002 रडार सिस्टम भी लगाए जा रहे हैं। ये सभी टारगेट्स को ट्रैक कर उन्हें खत्म करने में मदद करते हैं।” विशेषज्ञों का मानना है कि, मिसाइल निर्माण करके चीन भारत को उकसाने का काम कर रहा है। यह कदम दोनों देशों के बीच सीमा तनाव को और ज्यादा जटिल कर सकता है।

भारत से विवाद के बाद विश्व स्तर पर फजीहत से बौखलाया चीन

भारत से विवाद के बाद भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया समेत यूरोप के कई देशों ने अपने-अपने यहां चीन के व्यापार पर लगाम कस दी है। भारत ने चीन के टेक सेक्टर को चोट पहुंचाने के अलावा रेलवे, इनफ्रास्ट्रक्चर, टेलीकॉम और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों को चाइना-फ्री करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ाए हैं। ऐसे में अब बौखलाए चीन ने भारत को परेशान करने के लिए हिंदुओं के धार्मिक स्थल कैलाश पर्वत का खरतनाक साजिश रची है।

मालूम हो कि चीनी सेना द्वारा फ़िंगर एरिया, गैलवान घाटी, हॉट स्प्रिंग्स और कोंगरुंग नाला सहित कई इलाकों में बदलाव किया गया, जिसको लेकर दोनों देशों में गतिरोध है। जून में, पूर्वी लद्दाख में चीनी सैनिकों के साथ हिंसक झड़प में 20 भारतीय सैनिक शहीद हो गए थे।

चार धर्मों का पूजनीय स्थल

कैलाश पर्वत और मानसरोवर झील, जिसे आमतौर पर कैलाश-मानसरोवर स्थल के रूप में जाना जाता है। यह चार धर्मों का पूजनीय स्थल है और भारत में सांस्कृति और आध्यात्मिक शास्त्रों से जुड़ा हुआ है। हिंदू इस स्थल को शिव और उनकी पत्नी पार्वती का निवास मानते हैं।

तिब्बती बौद्ध लोग पहाड़ को कंग रिंपोछे कहते हैं। जैन इस पहाड़ को अस्तपद कहते हैं। इसे वह स्थान माना जहां उनके 24 आध्यात्मिक गुरुओं में से प्रथम ने मोक्ष प्राप्त किया। तिब्बत का बौद्ध पूर्व धर्म बोन्स के अनुयायी इस पर्वत को आकाश की देवी सिपाईमेन का निवास स्थान बताया। यह पवित्र स्थल सिंधु, ब्रह्मपुत्र, सतलज और कर्णाली (गंगा की एक प्रमुख सहायक नदी) का उद्गम स्थल भी है।

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