December 2, 2022

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VIDEO: मेजर विभूति ढौंडियाल को मरणोपरांत शौर्य चक्र से किया गया सम्मानित; पांच आतंकवादियों को मार गिराया था

देहरादून:  पांच आतंकियों को ढेर करने वाले वीर भूमि उत्तराखंड के शहीद मेजर विभूति शंकर ढौंडियाल को मरणोपरांत शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया।

उन्होंने न सिर्फ पांच आतंकवादियों को मार गिराया था, बल्कि 200 किलोग्राम विस्फोटक सामग्री भी बरामद की थी। दिल्ली में आयोजित अलंकरण समारोह में उनकी पत्नी लेफ्टिनेंट नितिका कौल ढौंडियाल और मां ने राष्ट्रपति से पुरस्कार ग्रहण किया। नितिका ढौंडियाल ने पति की शहादत के बाद आर्मी ज्वाइन की थी। मेजर विभूति शंकर ढौंडियाल उत्तराखंड के देहरादून के रहने वाले थे।

बता दें कि, देहरादून निवासी विभूति ढौंडियाल जम्मू-कश्मीर में 18 फरवरी 2019 में हुए सैन्य अभियान में शहीद हो गए थे। 14 फरवरी 2019 को पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर आतंकी हमला हुआ था। इसमें 40 जवान शहीद हो गए थे। इस हमले के बाद ही पुलवामा के पिंगलान गांव में आतंकियों को ढेर करने के लिए सेना ने एक ऑपरेशन चलाया था। पिंगलान में हुए इस एनकाउंटर में चार सैनिक शहीद हुए थे। इन शहीदों में मेजर रैंक के ऑफिसर विभूति ढौंढियाल भी थे।

मेजर ढौंडियाल की शहादत के बाद जब उनका पार्थिव शरीर देहरादून पहुंचा था तो पत्नी नितिका ने गर्व के साथ उनके पार्थिव शरीर को देख सैल्‍यूट किया था। तब नितिका ने कहा, ‘आपने मुझसे झूठ कहा था कि आप मुझसे प्‍यार करते हो। आप मुझसे नहीं बल्कि अपने देश से ज्‍यादा प्‍यार करते थे और मुझे इस बात पर गर्व है।’

शहीद मेजर विभूति शंकर ढौंडियाल के नक्शेकदम पर चलते हुए नितिका कौल ने सेना की वर्दी पहनी है। निकिता ने दिसंबर 2019 में इलाहाबाद में वूमेन एंट्री स्कीम की परीक्षा दी थी। इसके बाद चेन्नई की ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी (ओटीए) से निकिता को कॉल लेटर आया और ट्रेनिंग पूरी कर निकिता ओटीए की पासिंग आउट परेड में बतौर लेफ्टिनेंट आधिकारिक रूप से सेना में शामिल हो गईं।

शहीद मेजर विभूति शंकर ढौंडियाल का जन्म 19 फरवरी 1985 को हुआ था। उनके पिता ओमप्रकाश ढौंडियाल का वर्ष 2012 में देहांत हो चुका है। वे कंट्रोलर ऑफ डिफेंस अकाउंट्स (सीडीए) में सेवारत रहे। उनकी मां सरोज और दादी देहरादून में रहती हैं। शहीद ढौंडियाल तीन बहनों के इकलौते भाई थे। साल 2011 में ओटीए से पासआउट होकर वह सेना का हिस्सा बने। मेजर विभूति की शादी 18 अप्रैल 2018 को हुई थी। इसके ठीक दस महीने बाद ही मेजर विभूति शहीद हो गए थे।

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