December 2, 2022

उत्तराखंड जन

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राजस्थान में कांग्रेस सरकार ने की पुरानी पेंशन बहाल, पूर्व सीएम हरीश रावत ने धन्यवाद के साथ दोहराई प्रतिबद्धता, उत्तराखंड कार्मिकों में भी जगी उम्मीद..

देहरादून: राजस्थान सरकार ने आज बजट पेश किया। इसमें बड़ा फैसला लेते हुए पुरानी पेंशन स्कीम को बहाल करने का भी ऐलान किया गया है। कर्मचारियों को बड़ा तोहफा देते हुए 1 जनवरी 2004 और उसके बाद नियुक्त कर्मियों के लिए पहले की तरह पेंशन की घोषणा की गई है। बता दें कि यूपी विधानसभा चुनाव में भी ये बड़ा मुद्दा बन गया है। वहीं राजस्थान सरकार की ओर से पुरानी पेंशन बहाली का फैसला लेने के बाद उत्तराखंड के 80 हजार कार्मिकों में भी उम्मीद जग गई है। पुरानी पेंशन बहाली के लिए लड़ाई लड़ रहे कर्मचारी संगठनों ने राजस्थान सरकार का स्वागत करने के साथ ही उत्तराखंड की सत्ता में आने जा रही नई सरकार से उम्मीद जताई है।

इसके बारे में राजस्थान के सीएम गहलोत ने ट्वीट करके भी जानकारी दी। उन्होंने लिखा, ‘हम सभी जानते हैं सरकारी सेवाओं से जुड़े कर्मचारी भविष्य के प्रति सुरक्षित महसूस करें तभी वे सेवाकाल में सुशासन के लिए अपना अमूल्य योगदान दे सकते हैं। अतः 1 जनवरी 2004 और उसके पश्चात नियुक्त हुए समस्त कार्मिकों के लिए मैं आगामी वर्ष से पूर्व पेंशन योजना लागू करने की घोषणा करता हूं।’

इसको लेकर उत्तराखंड के पूर्व सीएम हरीश रावत ने राजस्थान के सीएम गहलोत को धन्यवाद दिया है। साथ ही उत्तराखंड में भी इस निर्णय को लागू करने की प्रतिबद्धता दोहराई है। बता दें कि, विधानसभा चुनाव 2022 के अपने घोषणापत्र में भी कांग्रेस ने इस वादे को सम्मिलित किया है।

पूर्व सीएम हरीश रावत ने लिखा कि, “Thank you Ashok Gehlot ji, आपने एक रास्ता दिखा दिया ओल्ड पेंशन स्कीम लागू कर आपने कांग्रेस शासित राज्यों के लिए एक उदाहरण स्थापित कर लिया है। हमने भी अपने घोषणापत्र में बहुत अध्ययन के बाद इस वादे को सम्मिलित किया है कि हम सत्ता में आएंगे पुरानी पेंशन लागू करेंगे। निश्चय ही उत्तराखंड में कांग्रेस की सरकार बनने की स्थिति में हम आपके निर्णय का लाभ उठाएंगे और तदनुसार उत्तराखंड में कांग्रेस पार्टी भी इस निर्णय को लागू करना चाहेगी।”

पुरानी पेंशन स्कीम के बारे में जानिए

2004 से पहले सरकारी नौकरी ज्वाइन करने वालों को रिटायरमेंट के बाद एक Defined Pension मिलती थी। यह पेंशन उनकी सर्विस की अवधि के बेस पर नहीं बल्कि, रिटायरमेंट के समय कर्मचारी की सैलरी पर निर्भर करती थी। इस स्कीम के तहत रिटायर्ड कर्मचारी की मौत के बाद उसके परिवार वालों को भी पेंशन सुविधा का लाभ मिलता था।

2004 के बाद से NPS व्यवस्था

2004 से गवर्नमेंट जॉब (सशस्त्र बलों को छोड़कर) ज्वाइन करने वालों को NPS Scheme के तहत पेंशन मिलती है। इस स्कीम में सरकार 14% का अंशदान करती है। वहीं, कर्मचारी भी अंशदान करते हैं और रिटायरमेंट के समय कर्मचारी के नाम से एक Corpus तैयार हो जाता है और रिटायरमेंट के बाद उस Corpus से उसे एक Annuity खरीदनी होती है। इस Annuity के तहत हर महीने पेंशन मिलती है।

गौरतलब है कि, पुरानी पेंशन बहाली को लेकर राज्य कर्मचारियों और शिक्षकों ने काफी बार सरकार से मांग की थी। हड़ताल और धरना प्रदर्शन भी किया, लेकिन सरकार ने हर बार आश्वासन देकर छोड़ दिया। कर्मचारियों और शिक्षकों का मानना है कि आज तक इस मुद्दे पर कोई भी विधायक, मंत्री और सांसद नहीं बोला, क्योंकि वह खुद पेंशनभोगी हैं और जीवन भर पेंशन और अन्य सुविधाएं लेते हैं, लेकिन 30 से 35 साल तक सेवा करने के बाद भी कार्मिकों को पेंशन देने की बात पर वे पीछे हट जाते हैं।

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