मुंबई: श्री शंकराचार्य उत्सव सेवालय के तत्वावधान में गढ़वाल भ्रातृ मंडल, मुंबई द्वारा आयोजित ‘मुंबई उत्तराखंड महोत्सव’ के अंतर्गत एक भव्य सांस्कृतिक संध्या ‘एक शाम उत्तराखंड के नाम’ का आयोजन बोरीवली-पश्चिम के कोरा केंद्र मैदान में किया गया। इस अवसर पर उत्तराखंड की संस्कृति, लोक कला और परंपराओं का शानदार प्रदर्शन हुआ, जिसने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ ज्योतिष पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने उत्तराखंड की अधिष्ठात्री देवी नंदा देवी की डोली का विधिवत पूजन कर किया। चंद्रशेखर टेंभेकर और मदन मोहन गोस्वामी ने शंकराचार्य जी को माल्यार्पण कर सम्मानित किया। इस अवसर पर उत्तराखंड सरकार के प्रवासी प्रकोष्ठ के अध्यक्ष व राज्य मंत्री दर्जा प्राप्त पूरन चन्द्र नैनवाल ने भी उपस्थिति दर्ज कराकर शंकराचार्य जी का आशीर्वाद प्राप्त किया।

सांस्कृतिक संध्या में गणेश स्तुति, मांगल गीत, कृष्ण लीला, जागर और झोड़ा जैसे उत्तराखंडी लोक नृत्यों ने दर्शकों का दिल जीत लिया। रामेश्वर गैरोला के संगीत संयोजन में लोक गायक प्रदीप रावत, बिहारी लाल काला, आशा राम रतूड़ी, लोक गायिका सरिता पौडेल, रत्ना कुंवर और अनीता रावत ने अपने मधुर गीतों से समां बांध दिया।

नंदा देवी राज जात डोली की प्रस्तुति में उमेश डिमरी, सुरेश पुरोहित, अवतार नेगी और बिरेंद्र गुसाईं का उल्लेखनीय योगदान रहा। कार्यक्रम का कुशल संचालन सुरेंद्र भट्ट और धनंजय रावत ने संयुक्त रूप से किया।

कार्यक्रम में मोहन काला, मदन मोहन गोस्वामी, गिरेंद्र मित्तल, सुरेंद्र मित्तल, विनोद गुप्ता, धर्मानंद रतूड़ी, विजया पंत तुली, शंकर सिंह रावत, अर्जुन सिंह रावत, बुद्धि प्रसाद देवली सहित कई गणमान्य व्यक्तियों ने शिरकत की और शंकराचार्य जी का आशीर्वाद लिया।
आयोजन समिति में गणेश नौटियाल, मनोज द्विवेदी, गोपाल नयाल, कीर्ति सिंह रावत, राम सिंह घटाल, रमेश बलोदी, माया जोशी, पुष्पा बिष्ट, विनोद भारद्वाज, अनिल भट्ट आदि शामिल थे। आयुष कंडारी, आशुतोष रतूड़ी, अनिल पाटिल, नंदकिशोर चतुर्वेदी, मंजीत रावत और शरद नेगी ने कार्यक्रम को सफल बनाने में विशेष योगदान दिया।

गढ़वाल भ्रातृ मंडल के अध्यक्ष रमण मोहन कुकरेती ने मंडल की गतिविधियों पर प्रकाश डाला और सभी का स्वागत किया।
कार्यक्रम के संयोजक राजीव नौटियाल ने इस आयोजन को अपार सफल बनाने के लिए सभी के प्रति आभार व्यक्त किया। यह आयोजन उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देने और प्रवासी उत्तराखंडी समुदाय को एक मंच प्रदान करने में महत्वपूर्ण साबित हुआ।

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