नई दिल्ली। पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने आतंकवाद के खिलाफ एक निर्णायक और आक्रामक नीति अपना ली है। इस नीति की झलक हाल ही में हुए ऑपरेशन सिंदूर में देखने को मिली, जिसमें भारतीय सेना ने सीमा पार आतंकी ठिकानों पर सर्जिकल कार्रवाई कर उन्हें तबाह कर दिया। अब भारत आतंकवाद से निपटने के लिए एक ‘नया युद्ध सिद्धांत’ अपनाने की योजना बना रहा है, जो देश की सुरक्षा नीति में बड़ा बदलाव लाएगा।
सूत्रों के मुताबिक, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान ही इस नए सिद्धांत के संकेत मिल चुके थे। इसके तहत भारत में होने वाला कोई भी आतंकी हमला अब केवल ‘आंतरिक संकट’ नहीं, बल्कि सीधे तौर पर ‘एक्ट ऑफ वॉर’ यानी युद्ध की कार्रवाई मानी जाएगी। इसका मतलब साफ है – अब जवाबी कार्रवाई सीमित नहीं, निर्णायक होगी।
CDS की अगुवाई में बनेगा नया ढांचा
चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) की अगुवाई में इस युद्ध सिद्धांत को संस्थागत रूप दिया जाएगा। इसकी प्रक्रिया चरणबद्ध ढंग से पूरी की जाएगी। इस नई रणनीति का मकसद है– दुश्मन को पहले ही रोकना और अगर हमला हो, तो उसकी भारी कीमत वसूलना।
जनरल द्विवेदी का साफ संदेश
कारगिल विजय दिवस के मौके पर लद्दाख में आयोजित समारोह में सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने दो टूक कहा ki कि दुश्मन को जवाब देना अब नया सामान्य होगा। ऑपरेशन सिंदूर से यह स्पष्ट हो गया है कि अब आतंक के आकाओं को भी बख्शा नहीं जाएगा।”
‘पहले वार करो, बाद में पूछो’
नई नीति के तहत भारत अब सामरिक संयम (Strategic Restraint) के बजाय निवारक कार्रवाई (Preventive Action) की ओर बढ़ेगा। इसमें शामिल होंगे:
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प्रोएक्टिव डेटेरेंस: पहले से तैयारी और सख्ती
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प्रिएम्टिव स्ट्राइक्स: हमला होने से पहले ही दुश्मन को ठिकाने लगाना
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प्रिवेंटिव ऐक्शन: संभावित खतरों को शुरुआत में ही समाप्त करना
क्या-क्या बदलेगा?
इस युद्ध सिद्धांत के साथ कई बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे:
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Future Warfare Analysis Group की स्थापना – जो भविष्य के युद्धों के स्वरूप का विश्लेषण करेगी और नई रणनीति बनाएगी।
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सेना का आधुनिकीकरण, नई ट्रेनिंग प्रणाली और ऑपरेशनल ढांचे का निर्माण
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जवाबी कार्रवाई का समय, स्थान और तरीका भारत तय करेगा, दुश्मन नहीं
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आतंकी और उसे पनाह देने वाले में कोई फर्क नहीं होगा – दोनों को बराबर सजा मिलेगी
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परमाणु धमकियों से डरने का दौर खत्म – भारत संयम के साथ-साथ हर विकल्प के लिए तैयार रहेगा
पाकिस्तान को सीधी चेतावनी
भारत ने साफ कर दिया है कि पाकिस्तान की ओर से आतंक को समर्थन अब ‘अघोषित युद्ध’ के रूप में देखा जाएगा। परमाणु हमले की गीदड़भभकियों से भारत डरने वाला नहीं, बल्कि अब वह सभी स्तरों पर जवाब देने के लिए स्वतंत्र रहेगा।

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