ज्योतिर्मठ। विकासखंड सभागार में बुधवार को ब्लॉक प्रमुख अनूप नेगी की अध्यक्षता में आयोजित इस वर्ष की पहली ब्लॉक डेवलपमेंट काउंसिल (बीडीसी) बैठक भारी हंगामे के बीच संपन्न हुई। बैठक में ग्रामीण क्षेत्रों की बदहाल बुनियादी सुविधाओं को लेकर जनप्रतिनिधियों का गुस्सा फूट पड़ा। पेयजल की भारी किल्लत, सड़कों की खस्ताहाली और स्वास्थ्य-शिक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दों पर अधिकारियों को जमकर घेरा गया। सदन की गंभीरता और अधिकारियों की लापरवाही को देखते हुए मुख्य विकास अधिकारी (CDO) अभिषेक त्रिपाठी ने बैठक से नदारद रहने वाले विभिन्न विभागों के उच्च अधिकारियों का वेतन रोकने के कड़े निर्देश जारी किए हैं।
पेयजल संकट और विभाग में व्याप्त कथित भ्रष्टाचार का मुद्दा सदन में सबसे अधिक गर्माया रहा। बैठक के दौरान जल संस्थान और जल निगम की कार्यप्रणाली पर ग्राम प्रधानों ने गंभीर सवाल खड़े किए। मलारी के प्रधान देव सिंह राणा ने जल निगम पर आरोप लगाते हुए कहा कि विभाग ने पुरानी पाइपलाइनों को बेचकर उनके स्थान पर अत्यंत घटिया किस्म की पाइपलाइन बिछाई है, जिसकी उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए। क्षेत्र पंचायत सदस्य डॉ. मनोज रावत ने भी समर्थन करते हुए बताया कि गांव-गांव में पेयजल लाइनें अधूरी छोड़ दी गई हैं, जिससे जनता को भारी किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। इसी क्रम में क्षेत्र पंचायत सदस्य रश्मि देवी ने मलारी गांव में सिंचाई नहरों के क्षतिग्रस्त होने और विभाग द्वारा मरम्मत न किए जाने पर नाराजगी जताई, जिससे खेती प्रभावित हो रही है।
सड़कों की बदहाली और सुरक्षा को लेकर भी सदन में काफी तीखी बहस हुई। जनप्रतिनिधियों ने हेलंग-उर्गम मोटर मार्ग पर लगातार हो रही दुर्घटनाओं और सलुड़-डूंग्रा मार्ग पर डामरीकरण न होने पर विभाग को कटघरे में खड़ा किया। लाता गांव के प्रधान ने आरोप लगाया कि पिछले 10 वर्षों से सड़क का निर्माण पूरा नहीं हो पाया है। वहीं, जुम्मा पुल से द्रोणागिरी गांव तक की सड़क पर डामर न होने और कोषा गांव की खराब सड़क व विद्युत व्यवस्था का मुद्दा भी छाया रहा। पीएमजीएसवाई और लोक निर्माण विभाग को चेताया गया कि बरसात के बाद खराब हुई सड़कों को युद्ध स्तर पर सुधारा जाए, अन्यथा आंदोलन की राह पकड़ी जाएगी।
वन विभाग की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में रही। डॉ. मनोज रावत ने सवाल उठाया कि जब ग्रामीण शीतकालीन प्रवास से लौटकर ग्रीष्मकालीन इलाकों में चले जाते हैं, तब विभाग चेक डैम का निर्माण करा रहा है, जिसका कोई औचित्य नहीं रह जाता। इसके अलावा, सितंबर माह में भालू द्वारा मकानों को पहुंचाए गए नुकसान का मुआवजा अब तक न मिलने पर भी गहरा रोष व्यक्त किया गया। अधिकारियों की बेरुखी पर कड़ा संज्ञान लेते हुए सीडीओ अभिषेक त्रिपाठी ने पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता (EE), सहायक अभियंता (AE), कनिष्ठ अभियंता (JE), खंड शिक्षा अधिकारी, सिंचाई विभाग के ईई, विद्युत विभाग के एसडीओ और जल निगम के ईई का वेतन तत्काल प्रभाव से रोकने के निर्देश दिए।
बैठक के अंत में ब्लॉक प्रमुख अनूप नेगी ने सख्त लहजे में कहा कि जनप्रतिनिधियों का सम्मान सर्वोपरि है। उन्होंने अधिकारियों को हिदायत दी कि वे जब भी किसी गांव के दौरे पर जाएं, तो वहां के प्रधान और क्षेत्र पंचायत सदस्य को अनिवार्य रूप से साथ रखें। उन्होंने कहा कि जल संस्थान और जल निगम की लापरवाही के कारण पूरे विकासखंड में पानी के लिए त्राहि-त्राहि मची है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। बैठक में ज्येष्ठ प्रमुख गुड्डी देवी, कनिष्ठ प्रमुख नरेश कुमार, खंड विकास अधिकारी मोहन जोशी, जिला पंचायत सदस्य रमा राणा, क्षेत्र पंचायत सदस्य रश्मि देवी, ग्राम प्रधान हरेंद्र सिंह रावत (कोशा), दयाल सिंह बिष्ट (जेलम), देव सिंह राणा (मलारी), महेश्वरी देवी (द्रोणागिरी), दीपा देवी (कागा), और ऊषा देवी (कैलाशपुर) सहित कई अन्य जनप्रतिनिधि व विभागीय कर्मचारी उपस्थित रहे।

More Stories
डीएम सविन बंसल के औचक निरीक्षण में खुला सब रजिस्टार कार्यालय में वर्षों से चल रहा करोड़ों का स्टांप चोरी खेल, उप निबंधक ऋषिकेश के निलंबन की शासन को संस्तुति
सीएम धामी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को शानदार बजट के लिए दी बधाई
राम नाम से कांग्रेस का विरोध पुराना – रेखा आर्या