देहरादून : देहरादून स्थित कुकरेजा इंस्टीट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट के ऑडिटोरियम में रविवार को गढ़रत्न एवं गढ़ गौरव नरेंद्र सिंह नेगी की अगुवाई में स्वर्गीय अंजली देवी स्मृति सम्मान 2026 का भावुक और प्रेरणादायी समारोह संपन्न हुआ। इस अवसर पर गढ़वाली भाषा में लिखित कथा संग्रह ‘कल्यो’ का लोकार्पण भी किया गया।
स्व. अंजली देवी, जो टिहरी गढ़वाल के भिलंगना विकासखंड के दूरस्थ गांव भिगुन की निवासी थीं, स्व. गणेश राम नौटियाल और श्रीमति गीता देवी की पुत्री थीं। बचपन से ही अत्यंत प्रतिभाशाली और आंग्ल विषय में विशेष निपुण अंजली देवी पहाड़ की नारी के उस गहन दर्द से जूझती रहीं, जो अक्सर अनदेखा रह जाता है। अल्पायु में उनकी मृत्यु ने उनकी छोटी बहन आशा को गहरी मानसिक पीड़ा दी। इसी पीड़ा से प्रेरित होकर आशा ने अपनी बहन की याद में यह सम्मान शुरू किया।
स्व. अंजली देवी स्मृति सम्मान केवल एक पुरस्कार नहीं, बल्कि पहाड़ी और उत्तराखंड की उन महिलाओं के लिए एक अस्तित्व की लड़ाई है, जिन्हें कभी किसी बड़े मंच पर स्थान या आवाज नहीं मिली। इस वर्ष सम्मान की थीम लेखन और साहित्य क्षेत्र में विशेष योगदान रखी गई थी। आने वाले वर्षों में लोक कला, लोक विद्या, संस्कृति संरक्षण, उद्यमिता, स्वास्थ्य और स्वरोजगार जैसी थीम्स पर फोकस किया जाएगा।

इस वर्ष स्व. अंजली देवी स्मृति सम्मान 2026 साहित्यकार बीना बेंजवाल को उनके उल्लेखनीय साहित्य सृजन के लिए प्रदान किया गया। विशेष सम्मान ग्राम खोला (भिलंगना विकासखंड, टिहरी गढ़वाल) के ग्राम प्रधान कैलाश प्रसाद ममगाईं को उनके सामाजिक कार्यों के लिए दिया गया। कैलाश ममगाईं पूरे गांव की बेटियों को स्वेच्छा से ‘कल्यो’ देने का अनूठा कार्य करते हैं।
समारोह में गढ़वाली कथा संग्रह ‘कल्यो’ का लोकार्पण नरेंद्र सिंह नेगी, श्रीमती बीना बेंजवाल, डॉ. कुसुम भट्ट, साहित्यकार दिनेश रावत और डॉ. नीता कुकरेती की उपस्थिति में हुआ। इस संग्रह में 7 कथाएं शामिल हैं, जो पहाड़ के जन-जीवन की वास्तविकता पर आधारित हैं।
‘कल्यो’ स्थानीय परंपरा का शब्द है, जिसमें मायके से ससुराल पक्ष को गांव भर में बांटा जाता है, लेकिन इस पुस्तक में कल्यो के पीछे छिपी भावनाओं और लंबी दास्तानों को उकेरा गया है। पुस्तक की समीक्षा डॉ. कुसुम भट्ट ने की। सभी वक्ताओं ने लेखिका आशा ममगाईं के शब्द संग्रहण और लोक जीवन की कहानियों की जमकर प्रशंसा की।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. साधना जोशी और शिक्षक-लेखक राघवेंद्र उनियाल ने गढ़वाली भाषा में कुशलतापूर्वक संभाला। समारोह में गौरव नौटियाल, ओम प्रकाश नौटियाल, ममता रावत, कल्पना असवाल, मोनिका भंडारी, प्रभव तथा प्रभव साहित्य संगीत कला मंच उत्तरकाशी के कई लेखक-कवि मौजूद रहे।

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