ज्योर्तिमठ। विश्व प्रसिद्ध स्कीइंग एवं शीतकालीन पर्यटन केंद्र औली की बदहाल व्यवस्थाओं और पर्यटन विभाग की कथित उदासीनता के खिलाफ गुरुवार को स्थानीय युवाओं, व्यापारियों और स्कीइंग खिलाड़ियों का आक्रोश फूट पड़ा। ‘औली बचाओ अभियान’ के बैनर तले एकजुट हुए प्रदर्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी करते हुए पर्यटन हितों की अनदेखी का आरोप लगाया।
प्रदर्शन में उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) और कांग्रेस के नेताओं ने भी सहभागिता करते हुए आंदोलन को अपना समर्थन दिया। वक्ताओं ने कहा कि औली प्रदेश की पर्यटन रीढ़ है, लेकिन वर्षों से उपेक्षा का शिकार होने के कारण इसकी पहचान और अर्थव्यवस्था दोनों खतरे में पड़ गई हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि वर्ष 2010–11 में करोड़ों रुपये की लागत से स्थापित की गई स्नो मेकिंग मशीनें आज रखरखाव के अभाव में ‘सफेद हाथी’ बनकर रह गई हैं। मशीनों के अनुपयोगी होने के कारण बर्फबारी की कमी के समय स्कीइंग गतिविधियां ठप हो जाती हैं, जिससे पर्यटकों की संख्या में भारी गिरावट दर्ज की जा रही है। इसका सीधा असर होटल, टैक्सी, गाइड और अन्य स्थानीय रोजगारों पर पड़ रहा है।
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र ही औली की पर्यटन व्यवस्थाओं को दुरुस्त नहीं किया गया और स्नो मेकिंग मशीनों को पूर्ण रूप से क्रियाशील नहीं किया गया, तो यह आंदोलन व्यापक जन-आंदोलन का रूप ले सकता है। उन्होंने सरकार से औली को बचाने के लिए ठोस नीति और तत्काल कार्रवाई की मांग की।

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