चमोली/कर्णप्रयाग। उत्तराखंड की आस्था, परंपरा और हिमालयी संस्कृति का प्रतीक मानी जाने वाली नंदा देवी राजजात को अब सितंबर 2026 के बजाय वर्ष 2027 में आयोजित किए जाने का प्रस्ताव सामने आया है। यह जानकारी श्रीनंदा देवी राजजात समिति के अध्यक्ष डॉ. राकेश कुंवर ने कर्णप्रयाग में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी।
डॉ. कुंवर ने बताया कि सितंबर माह में उच्च हिमालयी क्षेत्रों में हिमस्खलन का खतरा, तैयारियों की अधूरी स्थिति तथा राजजात के पारंपरिक 12 वर्षीय चक्र की गणना को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोपरि है और किसी भी प्रकार का जोखिम नहीं लिया जा सकता।
समिति ने राजजात जैसे विशाल धार्मिक आयोजन के सुचारु संचालन हेतु कुंभ प्राधिकरण की तर्ज पर एक पृथक ‘राजजात प्राधिकरण’ गठित करने का प्रस्ताव भी राज्य सरकार को भेजा है। वहीं प्रशासन द्वारा यात्रा मार्गों के सुधार और बुनियादी सुविधाओं के विकास के लिए 20 करोड़ रुपये की अग्रिम धनराशि जारी की जा चुकी है, जिससे भविष्य में लगभग 280 किलोमीटर लंबी इस कठिन पैदल यात्रा को अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक बनाया जा सके।
फैसले पर विरोध: “मां नंदा ही करेंगी निर्णय, व्यक्तियों का नहीं चलेगा आदेश”
राजजात को स्थगित करने के निर्णय पर नंदा धाम कुरुड़ के पुजारियों और स्थानीय संगठनों ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। कुरुड़ बंड डोली अध्यक्ष अशोक गौड़, सुखवीर रौतेला, नरेश गौड़ तथा संरक्षक कर्नल हरेंद्र सिंह रावत ने समिति के फैसले को राजनीति से प्रेरित बताते हुए कहा कि यह जनआस्था के साथ खिलवाड़ है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि नंदा देवी राजजात जैसे महान धार्मिक अनुष्ठान पर किसी व्यक्ति या समिति को एकतरफा निर्णय लेने का अधिकार नहीं है।
19 जनवरी को कुरुड़ मंदिर में महापंचायत
विवाद के बीच सोमवार, 19 जनवरी को कुरुड़ मंदिर में 484 गांवों के प्रतिनिधियों की एक बड़ी महापंचायत आयोजित की जाएगी। इस दौरान परंपरा के अनुसार मां नंदा को मंदिर में अवतरित किया जाएगा और देवी की इच्छा के अनुरूप ही यह तय किया जाएगा कि राजजात 2026 में होगी या नहीं। स्थानीय प्रतिनिधियों का कहना है कि राजजात को टालने का निर्णय जनभावनाओं के विपरीत है और अंतिम फैसला दिव्य संकेत व जन-सहमति के बाद ही स्वीकार्य होगा।

More Stories
सचिवालय एथलेटिक्स क्लब का अष्टम वार्षिक एथलीट मीट का आयोजन
राज्य सरकार देवभूमि उत्तराखंड के मूल स्वरूप को बचाए रखने के लिए कर रही है निरंतर कार्य – मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी
रासायनिक उर्वरकों का बढ़ता जाल : क्या अब बड़े सुधारों का समय आ गया है ?