- बाल कल्याण एवं संरक्षण समिति की बैठक का आयोजन, समिति को रोस्टर के अनुसार मुख्यालय में बैठने के निर्देश
- पॉक्सो पीड़िताओं एवं बाल देखरेख संस्थाओं में निवासरत बालिकाओं के लिए “खुशियों की सवारी” सुविधा उपलब्ध करायी जाएगी: जिलाधिकारी
- जिलाधिकारी ने बाल पंचायत के आयोजन पर दी सहमति, बाल संरक्षण समिति को सक्रियता से कार्य करने के निर्देश
पौड़ी : जिला बाल कल्याण एवं संरक्षण समिति की त्रैमासिक बैठक जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित हुई। बैठक में जनपद में संचालित विभिन्न बाल संरक्षण योजनाओं की प्रगति की समीक्षा करते हुए मिशन वात्सल्य, बाल श्रम उन्मूलन, बाल विवाह एवं बाल तस्करी की रोकथाम, विद्यालय छोड़ चुके बच्चों की पहचान तथा बाल संरक्षण तंत्र को और अधिक सुदृढ़ बनाने पर विस्तृत चर्चा की गयी।
जिलाधिकारी ने सभी संबंधित विभागों को निर्देशित किया कि बच्चों के हित से जुड़े प्रकरणों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि बाल अधिकारों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए विभागों के बीच बेहतर समन्वय अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि संवेदनशील मामलों में किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
गत बैठक में जिलाधिकारी द्वारा राजकीय संप्रेषण गृह (किशोर) गडोली के लिए अतिरिक्त पाइपलाइन की स्वीकृति दी गयी थी। जल संस्थान द्वारा प्रस्ताव बनाकर भेजा गया था। वर्तमान में जिलाधिकारी द्वारा धनराशि स्वीकृत कर उक्त कार्य की स्वीकृति दी गयी थी, जिस पर 13 फरवरी से कार्य शुरू हो चुका है। इसके लिए समिति ने जिलाधिकारी का धन्यवाद किया। साथ ही पॉक्सो प्रकरणों से संबंधित मेडिकल रिपोर्ट एवं चिकित्सीय परीक्षण की प्रतिलिपियां समय से उपलब्ध कराने, बाल प्रकरणों की प्रथम सूचना रिपोर्ट की प्रति शीघ्र उपलब्ध कराने, पॉक्सो प्रकरणों से संबंधित मेडिकल रिपोर्ट एवं चिकित्सकीय परीक्षण प्रतिलिपियां समय से उपलब्ध कराने पर भी जिलाधिकारी का धन्यवाद किया।
जिलाधिकारी ने पॉक्सो पीड़िताओं एवं बाल देखरेख संस्थाओं में निवासरत बालिकाओं के लिए “खुशियों की सवारी” सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए, जिससे उन्हें सुरक्षित एवं सम्मानजनक परिवहन सुविधा मिल सके। साथ ही उन्होंने नशामुक्ति से संबंधित रिपोर्ट पृथक रूप से प्रस्तुत करने तथा बच्चों एवं किशोरों को नशे से दूर रखने के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार कर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा।
उन्होंने राजकीय संप्रेषण गृह, गडोली में आवश्यक सुधार कार्य कराए जाने के निर्देश देते हुए मरम्मत कार्य, खेल सामग्री उपलब्ध कराने तथा पुस्तकालय विकसित करने पर जोर दिया, ताकि वहां निवासरत किशोरों को बेहतर वातावरण मिल सके। इसके अतिरिक्त बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) के सदस्यों को रोस्टर के अनुसार नियमित फील्ड निरीक्षण करने एवं जिला मुख्यालय में नियमित बैठकें आयोजित करने के निर्देश दिए, जिससे बच्चों से संबंधित मामलों का त्वरित निस्तारण हो सके। जिलाधिकारी ने बाल पंचायत के आयोजन पर भी सहमति प्रदान की।
जिलाधिकारी ने ग्राम एवं ब्लॉक स्तर पर गठित बाल संरक्षण समितियों को सक्रिय करने तथा जनपद में व्यापक जागरूकता अभियान संचालित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जनजागरूकता के माध्यम से बाल शोषण, उत्पीड़न, बाल विवाह एवं बाल श्रम जैसी कुप्रथाओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सकती है। उन्होंने सभी अधिकारियों को निर्देशित किया कि बाल हित से जुड़े प्रत्येक प्रकरण में संवेदनशीलता एवं तत्परता के साथ कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
बैठक में जिला परिवीक्षा अधिकारी अरविंद कुमार, जिला शिक्षाधिकारी माध्यमिक रणजीत सिंह नेगी, जिला समाज कल्याण अधिकारी रोहित सिंह, सहायक अर्थ एवं संख्याधिकारी रणजीत सिंह रावत, जिला कार्यक्रम अधिकारी देवेंद्र थपलियाल, जिला क्रीड़ा अधिकारी जयबीर रावत, बाल कल्याण समिति अध्यक्ष राकेश चंद्र, सदस्य गंगोत्री नेगी, सुनीता भट्ट, अमन, अभिषेक सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।


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