14 January 2026

वनाग्नि से फूलों की घाटी व हेमकुंड साहिब को नहीं कोई खतरा – डीएफओ दूबे

गोपेश्वर (चमोली)। चमोली जिले के गोविंदघाट रेंज में लक्ष्मण गंगा और अलकनंदा नदी के मध्य के वन क्षेत्र के चट्टानी हिस्से में सक्रिय वनाग्नि के चलते वन विभाग का दावा है कि इस वनाग्नि से फूलों की घाटी और हेमकुंड साहिब को कोई नुकसान नहीं हुआ है। गौरतलब है कि गोविंदघाट रैंज में लक्ष्मण गंगा और अंलकनंदा नदी के मध्य स्थिति वन क्षेत्र के चट्टानी हिस्से में नौ जनवरी को अचानक वनाग्नि सक्रिय है। इसकी जानकारी के बाद से वन विभाग, जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से लगातार आग को काबू करने के प्रयास जारी है। वनाग्नि से प्रभावित क्षेत्र के दोनों ओर लक्ष्मण गंगा और पुष्पावती नदियों की स्थित होने से फूलों की घाटी और हेमकुंड साहिब तक आग के पहुंचने की संभावना नहीं है। हालांकि वनाग्नि की रोकथाम के लिए जिलाधिकारी  गौरव कुमार के अनुरोध पर शासन की ओर से हेलीकॉप्टर से रैकी करने के साथ ही आग को बुझाने की योजना बनाई गई है।

बदरीनाथ वन प्रभाग के डीएफओ सर्वेश दूबे ने बताया कि नंदा देवी राष्ट्रीय में घटित वनाग्नि की घटना की जानकारी नौ जनवरी को मिली थी। इसको देखते हुए पार्क प्रशासन की ओर से दो टीमों का गठन किया गया। इसमें से एक टीम को अलकनंदा नदी को पार कर ऐरा प्रथम बीट स्थित वनाग्नि स्थल और दूसरी टीम को टीम को वनाग्नि के विस्तार का आंकलन करने के लिए ड्रोन निगरानी के लिए तैनात किया गया। प्रभावित क्षेत्र के अत्यधिक चट्टानी, खड़ी ढलान और ऊपर से पत्थर गिरने की संभावना को देखते हुए टीम की सुरक्षा के मध्य नजर वापस लौटना पड़ा। 10 जनवरी  को टीम ने डांडीसाल के सामने लक्ष्मण गंगा नदी पर अस्थाई पुल का निर्माण कर भ्यूंडार द्वितीय बीट तक पहुंची, परंतु रात्रि होने और विषम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण आगे नहीं बढ़ सकी। 11 जनवरी  को पुनः दो टीमें रवाना की गईं। प्रथम टीम भ्यूंडार द्वितीय बीट में जमे हुए झरने के नीचे तक पहुंची। द्वितीय टीम भ्यूंडार से वनाग्नि के विस्तार के आंकलन और ड्रोन सर्वेक्षण के लिए गई। 12 जनवरी को एक टीम भ्यूंडार होते हुए सिमरतोली तक पहुंची और रात्रि विश्राम भ्यूंडार में ही किया। 13 जनवरी महिला मंगल दल पुलना, ग्राम प्रधान पुलना, ग्रामीणों और रेंज स्टाफ के संयुक्त प्रयासों से लक्ष्मण गंगा में पुनः अस्थाई पुल बनाकर भ्यूंडार द्वितीय बीट में प्रवेश किया गया। अत्यधिक विषम परिस्थितियों के कारण टीम को कुछ दूरी से वापस लौटना पड़ा। हालांकि वनाग्नि अब धीरे धीरे कम हो रही है।

डीएफओ दूबे ने कहा कि वनाग्नि स्थल से फूलों की घाटी राष्ट्रीय उद्यान की हवाई दूरी लगभग सात किमी और जमीनी दूरी लगभग 22-25 किलोमीटर है। वनाग्नि स्थल और सुरक्षित क्षेत्रों (फूलों की घाटी एवं हेमकुंड साहिब) के मध्य दो प्रमुख नदियां लक्ष्मण गंगा और पुष्पावती प्रवाहित होती हैं। इन दोनों नदियों में जल का प्रवाह अत्यधिक है। नदियों के प्रवाह क्षेत्र की चौड़ाई भी विस्तृत है। जो एक सुरक्षित प्राकृतिक फायर लाइन का कार्य कर रही हैं। भौगोलिक बाधाओं और दूरी को देखते हुए, वनाग्नि के फूलों की घाटी राष्ट्रीय उद्यान या हेमकुंड साहिब तक पहुंचने की संभावना शून्य है। पार्क क्षेत्र पूरी तरह सुरक्षित है। उन्होंने बताया कि जिला प्रशासन और शासन के सहयोग से आज वनाग्नि क्षेत्र का हेली-सर्वेक्षण किया जाएगा।