नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड राज्य चुनाव आयोग की एक विशेष अनुमति याचिका (सिविल) को खारिज कर दिया और आयोग पर 2 लाख रुपये का जुर्माना लगाया। यह याचिका उत्तराखंड उच्च न्यायालय के 11 जुलाई 2025 के एक अंतरिम आदेश के खिलाफ दायर की गई थी, जिसमें उच्च न्यायालय ने आयोग द्वारा जारी एक स्पष्टीकरण को वैधानिक प्रावधानों के विपरीत मानते हुए उस पर रोक लगा दी थी। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने मामले की सुनवाई की।
आयोग की ओर से उपस्थित वकील जतिंदर कुमार सेठी और अन्य अधिवक्ताओं ने कोर्ट से हस्तक्षेप की मांग की, लेकिन कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह मामला हस्तक्षेप के योग्य नहीं है। कोर्ट ने छह बार यह बात दोहराने के बावजूद आयोग के वकील द्वारा बार-बार अनुरोध करने पर नाराजगी जताई।
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, “हमें इस रवैये से दुख हुआ है।” याचिका को खारिज करते हुए आयोग को 2 लाख रुपये का जुर्माना सुप्रीम कोर्ट विधिक सेवा समिति में चार सप्ताह के भीतर जमा करने का निर्देश दिया गया।
याचिका में देरी को माफ करने, उच्च न्यायालय के आदेश की प्रति दाखिल करने से छूट और अन्य छूट के लिए आवेदन भी शामिल थे, जिन्हें कोर्ट ने निपटा दिया। इस मामले में प्रतिवादी शक्ति सिंह भरथ्वाल और अन्य की ओर से अधिवक्ता अभिजय नेगी, स्निग्धा तिवारी, काव्या अग्रवाल और सुजॉय चटर्जी ने पक्ष रखा।

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