ज्योतिर्मठ : ज्योतिर्मठ के सिंहधार वार्ड में विकास और व्यवस्थाओं की भारी अनदेखी महिलाओं की जान पर भारी पड़ रही है। बद्रीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर जोगीधारा के समीप दो साल पहले हुई सड़क कटिंग ने दशकों पुराने पुश्तैनी रास्ते को पूरी तरह तहस-नहस कर दिया, जिसे आज तक ठीक नहीं किया गया। आलम यह है कि शशि देवी, आशा देवी और शांति देवी जैसी दर्जनों महिलाएं जान जोखिम में डालकर रोजाना जंगल से घास का भारी बोझ लेकर इसी खतरनाक चट्टान से उतरने को मजबूर हैं; स्थिति इतनी भयावह है कि महिलाओं को पहले अपने घास के गट्ठर को ऊपर से नीचे सड़क पर फेंकना पड़ता है और फिर मौत को मात देते हुए खुद चट्टान से नीचे उतरना पड़ता है। बीआरओ और स्थानीय प्रशासन की इस घोर लापरवाही के खिलाफ ग्रामीणों में भारी आक्रोश है, क्योंकि बार-बार गुहार लगाने के बाद भी न तो सुरक्षा दीवार बनी और न ही रास्ते का पुनर्निर्माण हुआ। हालांकि, अब उप जिलाधिकारी चंद्रशेखर वशिष्ठ ने जल्द बैठक कर समस्या के समाधान का आश्वासन दिया है, लेकिन स्थानीय महिलाओं के लिए हर गुजरता दिन एक नई अग्निपरीक्षा बना हुआ है।

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