Mardaani 3 : भारतीय सिनेमा में जब भी पर्दे पर साहस और शक्ति की बात आती है, तो जहन में सबसे पहला नाम रानी मुखर्जी का आता है। ‘मर्दानी’ फ्रेंचाइजी के जरिए महिला पुलिस अधिकारी की एक नई परिभाषा गढ़ने वाली रानी असल जिंदगी में भी उतनी ही मुखर और निडर हैं। हाल ही में एक इंटरव्यू में रानी ने भारतीय महिलाओं की सहनशक्ति और उनके ‘सुपरपावर’ पर ऐसी बात कही है, जो हर महिला को गर्व महसूस कराएगी।
‘प्यार मिले तो गौरी, अपमान मिले तो दुर्गा’
रानी मुखर्जी मीडिया से बातचीत में बताया कि महिलाओं के बहुआयामी व्यक्तित्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा, ‘मैं हमेशा कहती हूं कि महिलाएं अपने आप में शक्ति का साक्षात स्वरूप हैं। अगर किसी महिला को प्यार और सम्मान दिया जाए, तो वह देवी गौरी और पार्वती की तरह शांत और करुणामयी होती है। लेकिन, अगर कोई उसके आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाता है, तो वही महिला देवी चंडी और दुर्गा का रूप धारण करने में देर नहीं लगाती।’
हर भारतीय महिला में छिपी है एक ‘सुपरपावर’
रानी मुखर्जी का मानना है कि ताकत सिर्फ वर्दी या पद में नहीं होती। उन्होंने आगे कहा, हर भारतीय महिला के भीतर एक ‘सुपरपावर’ है। चाहे वह घर संभालने वाली गृहिणी हो, क्लासरूम में पढ़ाने वाली टीचर हो, पत्रकार हो या पुलिस अफसर। महिलाएं न केवल अपना काम ईमानदारी से करती हैं, बल्कि परिवार और प्रोफेशनल लाइफ के बीच जो संतुलन बनाती हैं, वही उनकी असली ताकत है।’
बिना शोर मचाए संघर्ष करने वाली महिलाएं हैं असली ‘हीरो’
बॉलीवुड की ‘मर्दानी’ ने समाज की उन महिलाओं को असली हीरो बताया जो बिना सुर्खियों में आए हर दिन संघर्ष करती हैं। रानी ने कहा, ‘वर्दी पहनने वाली महिलाएं भी आम महिलाओं की तरह ही होती हैं, लेकिन उनकी मानसिक और भावनात्मक मजबूती उन्हें खास बनाती है। मैं उन सभी महिलाओं से प्रेरित हूं जो बिना शोर मचाए समाज और परिवार के लिए लड़ती हैं। मेरे लिए दुनिया को यह दिखाना जरूरी है कि असली ‘मर्दानी’ और असली ‘हीरो’ कौन है।’

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