नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच जारी संघर्ष के चलते वैश्विक आपूर्ति शृंखला प्रभावित हुई है। खासतौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधा आने से पेट्रोलियम उत्पादों की आवाजाही पर असर पड़ा है। इसी बीच भारत सरकार ने देश में रसोई गैस की आपूर्ति सुचारू बनाए रखने के लिए बड़ा कदम उठाया है।
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत प्राकृतिक गैस और पेट्रोलियम उत्पाद वितरण आदेश-2026 जारी किया है। इस आदेश के तहत जिन क्षेत्रों में पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) की सुविधा उपलब्ध है, वहां के उपभोक्ताओं के लिए PNG कनेक्शन लेना अनिवार्य कर दिया गया है। यदि कोई उपभोक्ता निर्धारित समय में PNG कनेक्शन नहीं लेता है, तो सूचना दिए जाने के तीन महीने बाद उसकी एलपीजी आपूर्ति बंद की जा सकती है।
सरकार के अनुसार यह कदम एलपीजी की कमी को देखते हुए उठाया गया है। पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के कारण गैस आपूर्ति प्रभावित हुई है और भारत को आयात में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में सरकार ‘ईंधन विविधीकरण’ को बढ़ावा देकर एलपीजी पर निर्भरता कम करना चाहती है। इसका उद्देश्य शहरी क्षेत्रों से एलपीजी की मांग कम कर ग्रामीण और दूरदराज इलाकों में इसकी उपलब्धता सुनिश्चित करना है।
नए नियमों के तहत हाउसिंग सोसाइटी और आवासीय परिसरों को गैस पाइपलाइन बिछाने की अनुमति देने में देरी नहीं कर सकेंगे। संबंधित संस्थाओं को तीन कार्य दिवस के भीतर अनुमति देनी होगी और 48 घंटे के भीतर अंतिम कनेक्टिविटी उपलब्ध करानी होगी। यदि कोई सोसाइटी अनुमति नहीं देती है, तो उसे नोटिस दिया जाएगा और तीन महीने बाद उस परिसर की एलपीजी आपूर्ति रोकी जा सकती है।
सरकार ने गैस कंपनियों और संबंधित एजेंसियों के लिए भी समय-सीमा तय की है। पाइपलाइन बिछाने के लिए जरूरी अनुमतियां समय पर न मिलने पर उन्हें स्वतः स्वीकृत माना जाएगा। वहीं, कंपनियों को मंजूरी मिलने के चार महीने के भीतर काम शुरू करना होगा, अन्यथा उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
हालांकि, जिन क्षेत्रों में तकनीकी कारणों से PNG कनेक्शन देना संभव नहीं है, वहां उपभोक्ताओं को राहत दी गई है। संबंधित गैस कंपनी द्वारा प्रमाणित किए जाने पर ऐसे उपभोक्ताओं की एलपीजी आपूर्ति जारी रहेगी।
सरकार का मानना है कि PNG अपनाने से उपभोक्ताओं को भी लाभ मिलेगा, क्योंकि यह पाइपलाइन के जरिए सीधे घर तक पहुंचती है और बार-बार सिलेंडर बुकिंग की जरूरत नहीं पड़ती। पेट्रोलियम सचिव नीरज मित्तल के अनुसार, यह कदम देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और वैश्विक संकट के प्रभाव को कम करने की दिशा में अहम साबित होगा।

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