22 June 2024

कपाट खुलने के शुरूआती 15 दिनों में 03 लाख 63 हजार से अधिक तीर्थयात्री पहॅुंचे गंगोत्री एवं यमुनोत्री धाम, यात्रा सुचारू व सुव्यस्थित रूप से जारी, डीएम डॉ. मेहरबान सिंह बिष्ट ने कहा बिना पंजीकरण के यात्रा की अनुमति नहीं

  • कपाट खुलने के शुरूआती 15 दिनों में गंगोत्री एवं यमुनोत्री धाम 363537 तीर्थयात्री पहॅुंचे।
  • यात्रा सुचारू व सुव्यस्थित रूप से जारी
  • यात्रा हुई सुगम, लग रहा है कम समय
  • जिलाधिकारी ने कहा बिना पंजीकरण के यात्रा की अनुमति नहीं
उत्तरकाशी : आज यमुनोत्री धाम में 9812 एवं गंगोत्री धाम में 13602 तीर्थयात्रियों का आगमन हुआ। इस प्रकार से कपाट खुलने के शुरूआती 15 दिनों के भीतर इन दोनों में धामों में कुल  363537 तीर्थयात्री पहॅुंच चुके हैं। जबकि इन दोनों धामों में यात्रा के शुरूआती 15 दिनों में वर्ष 2023 में 197413 एवं वर्ष 2022 में 222852 यात्रियों का आगमन हुआ था। इस बार शुरूआती दिनों में रिकार्ड संख्या में तीर्थयात्रियों के पहॅुचने के बावजूद जिले में चारधाम यात्रा सुचारू और सुव्यस्थित ढंग से जारी है। इस बीच जिलाधिकारी डॉ. मेहरबान सिंह बिष्ट ने गंगोत्री यात्रा मार्ग के विभिन्न पड़ावों का भ्रमण कर यात्रा व्यवस्थाओं को चाक-चौबंद बनाए रखने के संबंध में अधिकारियों को जरूरी हिदायतें जारी करते हुए कहा है कि बिना पंजीकरण के किसी भी व्यक्ति को यात्रा की अनुमति नहीं दी जाय।
इस बार चारधाम यात्रा के शुरूआती 15 दिनों के भीतर यमुनोत्री धाम में 186744 और गंगोत्री धाम में 176793 यात्री पहॅुंच चुके हैं। जबकि गत वर्ष 2023 में यात्रा के शुरूआती 15 दिनों में यमुनोत्री धाम में 92583 एवं गंगोत्री धाम में 104830 तीर्थयात्रियों का आगमन हुआ था। इससे पहले वर्ष 2022 में भी कपाट खुलने के बाद से 15 दिनों के भीतर यमुनोत्री धाम में 100527 एवं गंगोत्री धाम में 122325 तीर्थयात्री आए थे। यात्रा के शुरूआती 15 दिनों के दौरान इस बार दोनों धामों में 31206 वाहन पहॅुंच चुके हैं, जबकि वर्ष 2023 में 18132 वाहन एवं वर्ष 2022 में 20863 वाहन 15 दिनों में दोनों धामों की यात्रा पर पहॅुंचे थे।
इस बार गंगोत्री एवं यमुनोत्री धाम की यात्रा पर आने वाले यात्रियों एवं वाहनों की  संख्या में भारी वृद्धि के बावजूद यात्रा व्यवस्थित रूप से चल रही है और जरूरी होने पर ही वाहनों को वन-वे व गेट व्यवस्था के लिए होल्डिंग प्वाईंट्स पर रोके जाने के साथ ही ठहराव स्थलों व ठहराव समय के पुनर्निर्धारण के बाद धामों की यात्रा सुगम हुई है तथा यात्रा पर लगभग सामान्य दिनों जितना ही समय लग रहा है।