ज्योतिर्मठ : देवभूमि उत्तराखंड का राज्य पुष्प ‘बुरांश’ इन दिनों हिमालय की गोद में अपनी लालिमा बिखेर रहा है, लेकिन जोशीमठ के सिहंधार निवासी आयुष सती के लिए ये केवल पेड़ नहीं, बल्कि उनके परिवार के अटूट सदस्य हैं। उद्यान विभाग के समीप अपनी निजी भूमि पर आयुष 50 से अधिक बुरांश के पेड़ों का संरक्षण किसी संतान की भांति कर रहे हैं। आयुष बताते हैं कि इन पेड़ों को उनके दादा और पिता ने एक छोटे पौधे से पाल-पोषकर विशाल बनाया था और आज वह स्वयं इस विरासत को जीवित रखने का जिम्मा संभाल रहे हैं। जैसे-जैसे आयुष की उम्र बढ़ी, उनके साथ ये पेड़ भी ऊंचे होते गए और आज फरवरी-मार्च के महीने में जब पूरा बगीचा सुर्ख लाल फूलों से सराबोर होता है, तो यहाँ से गुजरने वाला हर पर्यटक इस विहंगम दृश्य को देख ठिठक जाता है। पर्यावरण संरक्षण की यह अनूठी मिसाल न केवल स्थानीय लोगों के लिए प्रेरणा बनी हुई है, बल्कि सोशल मीडिया के दौर में प्रकृति प्रेम का एक बड़ा संदेश भी दे रही है।
वहीं, नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क के वन क्षेत्राधिकारी गौरव नेगी ने सती परिवार के इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि बुरांश एक अति दुर्लभ और पारिस्थितिक रूप से महत्वपूर्ण वृक्ष है। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि जंगलों में लगने वाली भीषण आग से बुरांश की नई पौध को भारी नुकसान पहुँचता है, ऐसे में व्यक्तिगत स्तर पर इस प्रकार का संरक्षण बेहद सराहनीय है। उन्होंने आम जनमानस से अपील की है कि पर्यावरण के प्रति सकारात्मक पहल करें और वनाग्नि जैसी घटनाओं को रोकने के लिए जागरूक बनें। सती परिवार द्वारा संजोया गया यह बगीचा आज न केवल क्षेत्र की खूबसूरती बढ़ा रहा है, बल्कि यह भी साबित कर रहा है कि यदि मनुष्य ठान ले तो वह अपनी सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रख सकता है।

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