-बदरीनाथ तथा कर्णप्रयाग सीटें बनी राष्ट्रीय दलों को चुनौती
गोपेश्वर (चमोली)। उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी कमल किशोर डिमरी ने भी उत्तराखंड क्रांति दल का दामन थाम लिया है। इसके चलते चमोली जिले में सियासी हलचल तेज हो गई है।
बताते चलें कि कमल किशोरी डिमरी उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी रहे हैं। शिक्षा विभाग में एक शिक्षक के रूप में सेवा के दौरान ही उन्होंने बीआरएस लेकर सियासी हलचल पैदा कर दी थी। एक दौर में उनकी दावेदारी भाजपा से हो रही थी। इस बीच उन्होंने आम लोगों से संवाद और जनसंपर्क भी तेज कर दिया था। इसके चलते माना जा रहा था कि वह भाजपा के बैनर तले ही अपनी सियासी पारी की शुरूआत करेंगे। इस बीच यकायक उन्होंने उक्रांद का दामन थामने का निर्णय लिया। इसके चलते रविवार को जिला मुख्यालय गोपेश्वर में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने उक्रांद की सदस्यता ग्रहण कर ली है। उक्रांद की सदस्यता ग्रहण करने के साथ ही बदरीनाथ सीट पर सियासी हलचल भी तेज हो गई है। माना जा रहा है कि अब वह उक्रांद से ही विधानसभा का चुनाव लडेंगे।
वैसे पूर्व कुलपति डा. यूएस रावत भी पहले ही उक्रांद में शामिल होकर बदरीनाथ सीट से दावेदारी जता चुके हैं। इस बीच वह लगातार लोगों से परस्पर संवाद और जनसंपर्क कर अपनी सियासी आमद का इजहार कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि डा. रावत इन दिनों जोशीमठ तथा दशोली ब्लाॅकों पर ही फोकस किए हुए हैं। इससे पूर्व बृजमोहन सजवाण उक्रांद में रह कर लगातार जनसरोकारों से जुड़े सवालों को लेकर काफी सक्रिय हैं। हर मुद्दे को लेकर वे लगातार अपने कार्यकर्ताओं संग संघर्ष की भूमिका में खड़े होते दिखाई दे रहे हैं। हालांकि उन्होंने पोखरी, दशोली तथा जोशीमठ ब्लाॅकों पर पूरी तरह फोकस किया है। अब कमल किशोर डिमरी की आमद से उक्रांद को जनाधार भी मिलने के संकेत दिखाई देने लग गए हैं। वह राज्य आंदोलनकारी रहने के साथ ही शिक्षक संघ की राजनीति में भी सक्रिय रहे हैं। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष की कमान संभालने के चलते वह शिक्षक राजनीति में भी अपना दबदबा कामय कर अपनी सक्रियता का एहसास करा चुके हैं। पिछले दिनों उन्होंने बीआरएस लिया तो तमाम संगठनों ने उन्हें हाथोहाथ लिया। रविवार को यकायक उक्रांद की सदस्यता ग्रहण करने के दौरान आयोजित कार्यक्रम में बदरीनाथ सीट के उक्रांद के दावेदार भी मौजूद रहे। इससे इस बात के संकेत मिल रहे है कि अब उक्रांद ने कमल किशोर डिमरी पर ही दांव खेलने का मन बना लिया है।
पिछले चुनावों तक उक्रांद के दावेदार सांकेतिक तौर पर चुनाव लड़ते रहे हैं। इस बार उक्रांद के प्रति बढ़ता मोह इस बात का संकेत दे रहा है कि लोगों में भाजपा तथा कांग्रेस से मोहभंग होता जा रहा है और लोगों ने उक्रांद की ओर टकटकी लगानी शुरू कर दी है। कमल किशोर डिमरी की उक्रांद में आमद को इसी रूप में देखा जा रहा है।
चमोली जिले की बात करें तो कर्णप्रयाग सीट पर उक्रांद की ओर से युवातुर्क के रूप में आशीष नेगी की सक्रियता के चलते भाजपा तथा कांग्रेस के दावेदारों के पसीने छूट रहे हैं। आशीष नेगी ने जिस तरह कर्णप्रयाग तथा गैरसैण ब्लाॅकों में अपनी राजनीतिक सक्रियता प्रदर्शित करनी शुरू कर दी है उसके चलते वे दोनों राष्ट्रीय दलों के लिए चुनौती देने की स्थिति में आ खड़े हो गए हैं। कहा जा सकता है कि चमोली जिले में बदरीनाथ तथा कर्णप्रयाग सीटों पर उक्रांद के दावेदारों की मजबूत स्थिति के चलते चुनाव में संघर्ष की पृष्ठभूमि भी तैयार होने लगी है। इस बार इन दोनों सीटों पर उक्रांद के चुनौतीपूर्ण स्थिति में आने के कारण सियासत के गर्म होने के आसार भी अभी से बनते दिखाई देने लगे हैं। अब देखना यह है कि कमल किशोरी डिमरी की आमद से उक्रांद किस तरह आम जनता में अपनी पैठ बनाता है। इस पर ही उक्रांद प्रत्याशियों का भविष्य निर्भर करेगा।

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