बरेली । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस), अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एवीबीपी), युवा मोर्चा और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से लंबे समय तक जुड़े रहे समर्पित कार्यकर्ता श्री विश्व नाथ शर्मा का निधन हो गया। 54 वर्षीय शर्मा पिछले कुछ समय से किडनी की गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। उनके निधन से क्षेत्र के सामाजिक और राजनीतिक जगत में शोक की लहर है।
25 मई 1972 को जन्मे श्री विश्व नाथ शर्मा छात्र जीवन से ही राष्ट्रवादी विचारधारा से जुड़े रहे। बरेली कॉलेज से कला स्नातक की शिक्षा प्राप्त करने के बाद उन्होंने संघ और छात्र राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई। वर्ष 1996 में दिल्ली में हुए एक भीषण सड़क हादसे में रीढ़ की हड्डी टूटने के कारण उनका शरीर लकवाग्रस्त हो गया था, लेकिन विपरीत परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की कविता “हार नहीं मानूंगा, रार नहीं ठानूंगा” को जीवन का मूलमंत्र मानकर उन्होंने संघर्ष और आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की। परिवार के सहयोग से उन्होंने तेल एजेंसी से लेकर पीसीओ और फोटोस्टेट व्यवसाय तक का संचालन किया।
शारीरिक कठिनाइयों के बावजूद उनका सामाजिक और राजनीतिक सरोकार लगातार बना रहा। वे हर चुनाव में सक्रिय रहते थे और स्थानीय नेताओं से लेकर सांसदों तक से उनका सीधा संवाद था। हाल ही में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के परिणामों पर भी उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की थी। उनके संघर्षपूर्ण जीवन में परिवार और मित्रों का विशेष योगदान रहा। परिजनों और मित्रों द्वारा आयोजित शोकसभा में उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई। वक्ताओं ने कहा कि श्री विश्व नाथ शर्मा का जुझारू और राष्ट्रसमर्पित जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बना रहेगा।

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