चमोली/बद्रीनाथ : उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में सुबह से ही मौसम का रौद्र रूप देखने को मिल रहा है। जहाँ निचले इलाकों में मूसलाधार बारिश का दौर जारी है, वहीं 3000 से 3500 फीट की ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भारी बर्फबारी हो रही है। विश्व प्रसिद्ध बद्रीनाथ धाम, फूलों की घाटी और प्रमुख पर्यटक स्थल औली की ऊंची चोटियां पूरी तरह से सफेद चादर से ढक गई हैं। लगातार हो रही इस बर्फबारी के कारण नर और नारायण पर्वतों के साथ-साथ नीलकंठ पर्वत पर भी कड़ाके की ठंड पड़ रही है, जिससे तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई है।
रसोई गैस की किल्लत ने बढ़ाई मुसीबत
एक तरफ प्रकृति का प्रकोप जारी है, तो दूसरी तरफ कुप्रबंधन ने स्थानीय लोगों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। भीषण बारिश और ठंड के बावजूद लोग अपने घरों में रसोई गैस न होने के कारण छतरियां लेकर लंबी-लंबी कतारों में खड़े होने को मजबूर हैं। बुनियादी सुविधाओं के अभाव ने बारिश के बीच आम जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है।
चारधाम यात्रा और कपाट खुलने की चुनौतियां
आगामी 23 अप्रैल को भगवान बद्री विशाल के कपाट खुलने हैं और चारधाम यात्रा की शुरुआत होनी है। प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती मौसम बना हुआ है। बद्रीनाथ धाम में रुक-रुक कर हो रही बर्फबारी और बारिश के कारण यात्रा की तैयारियों में बाधा आ रही है। तीर्थयात्रियों की सुरक्षा और सुगम यात्रा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं क्योंकि सुबह और शाम के समय ठंड का प्रकोप बेहद तीव्र हो गया है।
अगले तीन दिनों का अलर्ट
मौसम विभाग की मानें तो राहत के आसार फिलहाल कम ही हैं। विभाग ने अगले तीन दिनों तक पहाड़ों में भारी बारिश और बर्फबारी का पूर्वानुमान जारी किया है। इससे आने वाले दिनों में ठंड और अधिक बढ़ने की संभावना है, जो चारधाम यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं और स्थानीय निवासियों के लिए एक बड़ी परीक्षा साबित हो सकती है।

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